Sunday, December 11, 2022

हरफनमौला व्यक्तित्व

 











हरफनमौला व्यक्तित्व~

छात्राओं के लिए मिसाल: ऋतिका शर्मा


          प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती। वह प्रतिकूल परिस्थितियों में भी अपनी योग्यता से सबका ध्यान आकृष्ट कर लेती है। जोधियासी की धरा पर भी ऐसी ही प्रतिभाशाली छात्रा है 'ऋतिका शर्मा' जिसने अपनी योग्यता के बलबूते सफलता के न केवल नये आयाम स्थापित किए हैं अपितु यह सिद्ध किया है कि परिश्रम की परिणति निस्संदेह सफलता होती है और विजय श्री उसी का वरण करती है। 

          कौशल्या देवी और सुखदेव शर्मा की लाडली पुत्री व हरफनमौला व्यक्तित्व की धनी ऋतिका शर्मा सामान्य परिवार में पली-बढ़ी, लेकिन जीवटता और कर्मठता के सहारे उसने हर क्षेत्र में अपना नाम रोशन किया है। कला, नृत्य, गायन, लेखन के क्षेत्र में सदैव लोहा मनाने वाली इस छात्रा ने सॉफ्टबॉल में विद्यालय का नाम संपूर्ण राजस्थान में रोशन किया है। इतना ही नहीं यह बालिका खो-खो, कबड्डी व एथलेटिक्स में भी सदा अग्रणी रही है। खेलकूद व सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ इस मेधावी बेटी ने दसवीं बोर्ड में भी 79 प्रतिशत के साथ कक्षा में तृतीय स्थान प्राप्त कर गार्गी पुरस्कार भी प्राप्त किया है। 

          अनुशासित, हँसमुख, कुशल वक्ता व कलाकार अर्थात् बहुमुखी व्यक्तित्व की धनी ऋतिका ने PCRA, BEE व अन्य चित्रकला प्रतियोगिताओं के साथ निबंध, भाषण, चार्ट प्रतियोगिताओं में विद्यालय स्तर पर, मेरी बेटी मेरा सम्मान जिला स्तर पर, सॉफ्टबॉल में उपविजेता राज्य स्तर पर और वेस्ट जॉन सॉफ्टबॉल में भी उपविजेता का पुरस्कार पाकर अपनी योग्यता व खेल कौशल का परचम लहराया है। 

Monday, November 28, 2022

कंप्यूटर लैब व स्मार्ट लाइब्रेरी का उद्घाटन

 














कंप्यूटर लैब व स्मार्ट लाइब्रेरी का उद्घाटन ~


गैर लाभकारी संस्था "कथा" की अच्छी पहल


           राउमावि जोधियासी में गैर लाभकारी संस्था "कथा" के सौजन्य से संस्था के निदेशक डॉ॰ आनंदसिंह राणा, सरपंच प्रतिनिधि दयालराम मूंड के मुख्य आतिथ्य व प्रधानाचार्य परमेश्वर लाल चेजारा की अध्यक्षता में कंप्यूटर लैब व स्मार्ट लाइब्रेरी का उद्घाटन हुआ।

          कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ॰ आनंदसिंह राणा ने बताया कि पद्मश्री प्राप्त गीता धर्मराजन द्वारा 1988 में स्थापित "कथा" विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त गैर-लाभकारी संस्था है, जो 19 राज्यों में कार्यरत है। जिसका उद्देश्य कहानियों और खेल पद्धति से विशेषतः पिछड़े समुदायों के गरीब बच्चों का शैक्षिक उन्नयन है। यह शैक्षिक पहल वैश्विक कंपनी 'हर्बालाइफ' द्वारा समर्थित है और अंतिम छोर तक के बच्चों तक पहुँचने के लिए सरकारी और गैर-लाभकारी संस्था के विद्यालयों के सहयोग से चलेगी। स्कूल हर स्तर पर कला, विज्ञान, गणित, प्रौद्योगिकी और सामाजिक कौशल को बढ़ावा देने के लिए 'प्रयोगशालाओं' और 'संसाधनों' से युक्त होंगे, जिसका उद्देश्य बच्चों का समग्र विकास करना है। प्रत्येक स्कूल 200 बच्चों तक पहुंचेगा और बच्चों को आजीवन शिक्षार्थी और भविष्य में बदलाव लाने वाले बनने में मदद करने के लिए उनकी कल्पना और रचनात्मकता का दोहन करने पर जोर देगा। हस्तक्षेप के अगले चरण में, कथा 6 और राज्यों को स्केल-अप करेगी और 3,000 बच्चों के जीवन को छूने और 75 शिक्षकों को प्रशिक्षित करने के लिए देश भर में 15 स्कूलों को लॉन्च करेगी, जो दुर्गम स्थानों में हैं। उन्होंने बताया कि "कथा" स्कूल को 3 शिक्षक प्रदान करेगी जो बच्चों और शिक्षकों को प्रौद्योगिकी और कहानी शिक्षण, कला और संस्कृति पर प्रशिक्षण प्रदान करेगी, ताकि सरकारी स्कूल के शिक्षक नई शिक्षा नीति 2020 के दिशानिर्देशों को पूरा करने के लिए तकनीक आधारित शिक्षण करवा सकें। 

          कथा प्रतिनिधि भगवान सिंह ने बताया कि इस लैब के तहत दस कंप्यूटर सेट मय प्रोजेक्टर, टीवी, दस मेज, तीस कुर्सियाँ व स्मार्ट लाइब्रेरी में पाँच टेबल, दो बुक रैक व छत्तीस कुर्सियाँ व "कथा" की विश्व स्तरीय पुस्तकें विद्यालय को प्रदान की गयी है। प्रधानाचार्य परमेश्वर चेजारा ने "कथा" के इस नेक कार्य को विद्यार्थी हितार्थ बताते हुए संस्था को धन्यवाद ज्ञापित किया। सरपंच प्रतिनिधि दयालराम मूंड ने जोधियासी ग्राम पंचायत की ओर से संस्था का आभार व्यक्त किया व लैब को नवीनतम तकनीकी ज्ञान हेतु उपयोगी बताया।

          कार्यक्रम का संचालन व्याख्याता मनोज व्यास ने किया। उन्होंने बताया कि संस्था "कथा" द्वारा विद्यालय के कक्षा एक से आठ के विद्यार्थियों को 170 बैग मय स्टेशनरी किट भी बाँटे गये।

          कार्यक्रम में स्टाफ सदस्य बोदूसिंह, रामेश्वर लाल, कन्हैयालाल, पवन तिवारी, मुकेश यादव, नारायणदान, हनुमान प्रसाद, रमेशनाथ, चोखाराम, अंजू शर्मा, कमला कड़वासरा, प्रहलाद सहाय, रेखा साद, धनसुखराम, ग्रामीणजन हरिसिंह, अरविंद सिंह, सुरेश रांकावत, नीतू स्वामी, रूपसिंह, ओमकंवर, बाबू, गीता, कृष्णा कंवर तथा सभी विद्यार्थी मौजूद रहे। 


Thursday, September 1, 2022

ग्रामीण ओलंपिक खेल संपन्न

 













ग्रामीण ओलंपिक खेल संपन्न


       राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में आज ग्राम पंचायत जोधियासी के ग्रामीण ओलंपिक खेलों का समापन समारोह करणसिंह के मुख्य आतिथ्य व कृष्णा कुलदीप की अध्यक्षता में रंगारंग कार्यक्रम के साथ हुआ। 

       सर्वप्रथम माँ सरस्वती के दीप प्रज्वलन उपरांत स्वागत गान से कार्यक्रम का श्री गणेश हुआ। तदुपरांत पीईईओ मनोज व्यास ने अपने उद्बोधन में सभी विजेताओं से बेहतर प्रदर्शन करने व ग्रामीणजन से इनके सहयोग की अपील की तथा सभी भामाशाहों व अतिथियों का आभार व्यक्त किया। छात्राओं ने हम बच्चे हिंदुस्तान के, काला दामण, बाईसा रो रूप, टूटे बाजूबंद री लूम, केसरिया बालम पधारो म्हारे देश गीत पर नृत्य प्रस्तुतियां दी। 

      समारोह में कबड्डी, खो खो, टेनिस बॉल क्रिकेट के विजेता खिलाड़ियों को मेडल व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया और ध्वज अवतरण के साथ मुख्य अतिथि करणसिंह ने खेलों के समापन की घोषणा की। इस अवसर पर ग्रामीणजन शंकरलाल बंजारा, महेन्द्र मिश्र, नेमीचंद दर्जी, श्रवण बंजारा, नेमीचंद बंजारा, सांवरीलाल, विष्णु आदि के साथ स्टाफ सदस्य रामेश्वर लाल, कमला कड़वासरा, अंजू शर्मा, दिनेश गौड़, पवन तिवारी, कन्हैयालाल, हनुमान प्रसाद, चोखाराम, रमेशनाथ, मुकेश यादव, कालूराम, विजेश बंजारा, रेखा साद, नारायणदान, धनसुखराम  पीईईओ कार्मिक पवन सारस्वत, सुमनबाला, बेगनाथ, लोकेश निरंजनी, विक्रम बिश्नोई, किरण, मधुबाला, पूजा, लोकेश बावलिया, अशोक कड़वा, श्रवण बिश्नोई और सभी विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन व्याख्याता बोदूसिंह ने किया।


Monday, August 29, 2022

ग्रामीण ओलंपिक खेल शुरू

 









ग्रामीण ओलंपिक खेल शुरू


       राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में आज ग्राम पंचायत जोधियासी के ग्रामीण ओलंपिक खेलों का उद्घाटन जगदीश अटल के मुख्य आतिथ्य व महेंद्र मिश्र की अध्यक्षता में रंगारंग कार्यक्रम के साथ हुआ। 

       पीईईओ मनोज व्यास ने उद्घाटन समारोह में सभी खिलाड़ियों से स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के साथ बेहतर प्रदर्शन करने की अपील की व अतिथियों का स्वागत किया। छात्राओं ने राजस्थान रंगीलो व उड़ जा अब तेरी बारी गीत पर नृत्य प्रस्तुतियां दी। 

      शारीरिक शिक्षक विजेश बंजारा के निर्देशन में आज कबड्डी प्रतियोगिता का आयोजन हुआ, जिसमें छात्र वर्ग में जोधियासी ने मांडेली को 51-27 से व छात्रा वर्ग में जोधियासी ने तीतरी को 38-14 से हराया। 

      इस अवसर पर ग्रामीणजन बंशीलाल सुथार, वार्ड पंच मनोज हेड़ा, तेजाराम, गोपालराम, हरजीराम, रूपचंद दर्जी, मांगूसिंह व समस्त स्टाफ सदस्य और विद्यार्थी उपस्थित रहे। संचालन व्याख्याता बोदूसिंह ने किया।

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Monday, August 15, 2022

स्वतंत्रता दिवस मनाया ~

 







 स्वतंत्रता दिवस मनाया ~

 

           रा.उ.मा.वि., जोधियासी (नागौर) में 76वाँ स्वतंत्रता दिवस समारोहपूर्वक मनाया गया। सरपंच कमला मूँड, छगनमल नाहर, राधाकिशन साद, जेठमल अटल, भींयाराम मूँड, कृष्णा कुलदीप के मुख्य आतिथ्य में ध्वजारोहण उपरांत सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दी गयी। दयालराम मूँड ने मुख्य वक्ता के रूप में उद्बोधन देते हुए शहीदों का पुण्य स्मरण कर सभी से देश सेवा का आह्वान किया। प्रधानाचार्य प्रीति गोरा ने विद्यालय के बेहतर बोर्ड परीक्षा परिणाम की जानकारी देते हुए भामाशाहों का आभार व्यक्त किया व विद्यालय की समस्याओं से अवगत करवाया।

           विद्यार्थियों द्वारा वंदेमातरम, इंडियन इंडियन, बूमरो, ऊंटगाडो, मरुरंग, ए वतन मेरे, चाँद रुपाला, इंडिया वाले जैसे बेहतरीन नृत्य, गीतों की शानदार प्रस्तुतियों के साथ भाषण, कविता एवं शिक्षाप्रद नाटकों का मंचन भी किया गया। श्रीराम साद को पर्यावरण मित्र के रूप में सम्मानित किया गया। बोर्ड कक्षाओं में प्रथम तीन स्थानों पर रहे 18 विद्यार्थियों, तृतीय सोपान उत्तीर्ण 11 स्काउट के साथ 16 भामाशाह व श्रेष्ठ शिक्षकों का सम्मान भी किया गया।

            कार्यक्रम में रामेश्वर लाल, बोदूसिंह, पवन तिवारी, अंजू शर्मा, कमला कड़वासरा, दिनेश गौड़,  हनुमान मीणा, चोखाराम, कालुराम, रमेशनाथ, मुकेश यादव, नारायणदान, रेखा साद, धनसुखराम, प्रहलाद सहाय, भेराराम आदि स्टाफ सदस्य एवं  राजेश शर्मा, पदमसिंह, रूपाराम दर्जी, मनोज हेड़ा, बजरंग पंचारिया, श्याम सुथार, धन्नाराम, मेघाराम, पुखराज बोथरा, अशोक टांडी, फूसगिरि, सुरेश रांकावत, विष्णु, भींयाराम, गायत्री सोनी, सुमनबाला, लोकेश, मंजु ओझा, छैलाराम, मांगूसिंह, सरिता, मनीष दर्जी, हरिनारायण, दीनदयाल, राकेश आदि ग्रामीणजन व पूर्व विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन हिन्दी व्याख्याता मनोज व्यास ने किया।

Friday, August 12, 2022

आजादी का अमृत महोत्सव मनाया

 









अमृत महोत्सव मनाया ~


           राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जोधियासी में 'आजादी का अमृत महोत्सव' कार्यक्रम समारोहपूर्वक मनाया। प्रातःकाल विद्यार्थियों ने प्रभात फेरी में नारों के उद्घोष द्वारा अमृत महोत्सव व हर घर तिरंगे के संदेश को जन जन तक पहुँचाया।

           प्रधानाचार्या प्रीति गोरा ने सर्वप्रथम ध्वजारोहण कर कार्यक्रम का प्रारंभ किया। इसके पश्चात व्याख्याता मनोज व्यास ने इस महोत्सव की उपादेयता को बताते हुए क्रांतिकारियों व स्वतंत्रता सेनानियों का स्मरण किया।

           निर्धारित समय सवा दस बजे विद्यार्थियों द्वारा राष्ट्रगीत, चार देशभक्ति गीतों व राष्ट्रगान का सामूहिक गायन किया गया। तदुपरान्त प्रधानाचार्या प्रीति गोरा ने सभी विद्यार्थियों से 'हर घर तिरंगा' का आह्वान करते हुए अमृत महोत्सव की सार्थकता बताई।

           कार्यक्रम में स्टाफ सदस्यों रामेश्वर लाल, कमला कड़वासरा, बोदूसिंह, दिनेश गौड़, पवन तिवारी, कन्हैयालाल, चोखाराम, रमेशनाथ, मुकेश यादव, कालूराम, मुकेश यादव, विजेश बंजारा,  रेखा साद, नारायणदान, प्रहलाद सहाय, धनसुखराम सहित ग्रामीणजन तथा सभी विद्यार्थी मौजूद थे। 

      

Thursday, June 23, 2022

पुस्तक समीक्षा: गुनगुनाता हूँ

 




पुस्तक समीक्षा: गुनगुनाता हूँ (रचयिता- गिरिराज व्यास)


        नागौर के उदीयमान रचनाकार गिरिराज व्यास की सद्यः प्रकाशित पुस्तक 'गुनगुनाता हूँ' में अध्यात्म, राष्ट्रीयता व नैतिक मूल्यों की त्रिवेणी का अनूठा संगम है, वहीं हृदय के भावों के सोते से निसृत मधुर गजलें व गीत भी मन को आह्लादित करते हैं।

        कवि मन की ऊर्मियाँ भक्ति व अध्यात्म में तरंगित होती हुई निराकार रूप को अभिव्यंजित करती कुछ यों गुनगुनाने लगती है—

अनादि अनंत अभेद अखंड

यत्र-तत्र-सर्वत्र ओम्कारा

ओम् कारा ओम् कारा ओम् कारा

ओssss म् कारा।।

        कभी आशिकी में सराबोर दिलकश ख्याल महफिल की रवानगी को और रंगीन होने तक होशोहवाश तक खो देते हैं—

होश की बातें कही और मयकदा चलने दिया।

आशिकी ने होश को भी कहाँ पता चलने दिया।।

          प्रेम के ढाई आखर को समझनेवाले भले पंडित कहलाएं, पर अधिकांश लोग इसे भला इसे कहाँ जान पाते हैं? कवि आत्मचक्षुओं से प्यार की कशिश को अनुभूत करने की बात करता है —

न किस्सा न ही कहानी कहो

मुहब्बत है तो जुबानी कहो

x       x      x      x

वर्ण है ना व्याकरण, अर्थ गढ़ लिया करो।

आत्मा की आँख से प्यार पढ़ लिया करो।

          युवा पीढ़ी को दिनकर की मानिंद हिम्मत और साहस की जिंदगी देने का प्रयास भी  प्रशंसनीय है। बाधाओं और कठिनाइयों में भी हर पल पौरुष के सहारे बढ़ने की नसीहत नितांत खुबसूरत बन पड़ी है—

पौरुष पुरुष का झंझा के तांडव से कब हारा है।

मांझी तेरी हिम्मत को तूफानों ने ललकारा है।

x      x      x      x

जलजले तो आते-जाते रहते

ये रुकी कश्तियाँ फिर चला देगी।

धीरज रखवमन तू थोड़ा और

हिम्मत मुश्कलों को हरा देगी।।  

          राष्ट्रकवि गुप्त की तरह मनुष्य जीवन की सार्थकता सिद्ध करने का आह्वान भी कुछ नया करने का ज़ज्बा पैदा करते हैं —

साथी इस दुनिया में आकर, तू कुछ नया कर।

तू कुछ नया कर, हो यारा तू कुछ नया कर।।          

           कवि राष्ट्र के गौरव व अतीत को चित्रित करने के साथ हमारी राष्ट्रभाषा हिन्दी की महिमा को काव्यमय बनाता हुआ उसे जन जन की भाषा करार देता है—

वीरों के कण-कण से पावन

रक्त भरे यहाँ ताल हैं।

शरणागत के रक्षक हम

दुश्मन के महाकाल हैं।      

x     x      x      x   

जन जन की धड़कन ये बोले

जय-जय हिन्दी राष्ट्र- भाषा।

कंठ-कंठ ये गिरा सुशोभित

हिन्दी भारत मन अभिलाषा।

           शिक्षक कवि भारत की नारी शक्ति को भी हमेशा अगली पंक्ति में देखने की हिमाकत करते हैं व भारत की बेटियों को श्रेष्ठता की प्रतिमूर्ति मानकर उनके वैशिष्ट्य को यों चित्रित करते हैं —

धड़कन है वतन की ये हैं वतन की चहेतियाँ

आस्माँ मुट्ठी में करलें भारत की ये बेटियाँ।   

            कवि का मन सुफियाना होकर यायावरी के शांत बगीचे में विचरण करने लगता है और जिंदगी के फलसफे़ को समझने का भी यत्न करता है तो कभी निर्लिप्त होकर प्रेम के पारावार में गोते लगाने लगता है —

अलमस्त है हर हाल में ना गमों का बोझ।

जिंदगी की मौज है ये जिंदगी की मौज।।

x     x      x      x   

छोटी-सी है जिंदगी है दिन दो-चार की।

चलो देख आएं यार हम गली प्यार की।।

x     x      x      x   

दौलतें ना शोहरतें ना खिताब चाहिए।

इश्क पढ़ रहा हूँ प्यार की किताब चाहिए।।          

            'गुनगुनाता हूँ' पुस्तक महज काव्य संग्रह न होकर नैतिक मूल्यों को पुनर्जीवित करने का सायास प्रयत्न भी है। पाश्चात्य आबोहवा में खोई वर्तमान पीढ़ी को हमारी सांस्कृतिक मूल्यों के तत्वों को जानने व माता पिता के दर्जे व उनके उदात्त रूप को समझने की सीख इन रचनाओं में है—

छूकर चरण पिता के, करलो इनकी पूजा।

एक ईश्वर आस्माँ पे, जमीं पे ईश्वर दूजा।।

x     x      x      x   

नमन मात-पिता शतबार, जीवन के आधार।

तुम पूजा तुम ही अर्चन, तुम ईश्वर साकार।

            कोरोना जैसी महामारी में भी कवि सजग होकर जीवन जीने का संदेश देते हैं और बेहतर भविष्य के वरण की बात करते हैं ताकि निराश व्यक्ति भी जिजीविषा के सहारे सुखद जीवन की आशा बरकरार रखे—

प्रकृति और प्रभु क्या दे रहे संदेश?

इस महाव्याधि से कुछ सीखे देश-विदेश।         

              शैलीगत दृष्टि से भी कविताओं के काव्य सौंदर्य पर दृष्टिपात करें तो यहाँ ओज, प्रसाद व माधुर्य की त्रिवेणी का संगम बेहतरीन ढंग से हुआ है। तत्सम व अरबी- फारसी शब्दों का बाहुल्य रचनाओं का स्तर बढ़ाता है व प्रभावित करता है।  इनके साथ लयात्मकता, चित्रात्मकता, लाक्षणिकता व अनुप्रास और रूपक की यत्र तत्र छटा दृष्टिगोचर होती है।   

मौला मेरे मौला, मुश्किलों का है मेला।

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अनादि अनंत अभेद अखंड।  

तकदीर की लकीरों/ जिंदगी की मौज/ औलियों की बंदगी/प्यार की बहरें/प्रभु की प्रीत....            

             विभिन्न भावों के झरते सोतों के साथ ब्रह्मानंद सहोदर यानि आनंद की प्राप्ति जैसे काव्य प्रयोजन की सार्थकता चरितार्थ हुई है।

भाव सौंदर्य के तहत वीर, शृंगार, भक्ति व शांत रस की रचनाओं का सम्मिश्रण पुस्तक को रोचक व पठनीय बनाता है। 

बुद्धि कला गुण सकल, वाक् सिद्धि वर दायिनी।

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वक्त पलट देता है हर बाजी।

तूफानों को हरा देता माँझी।।

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सुन के दिल की गज़ल सनम कहाँ जा रहे हो।

हुस्ने मल्लिका मुझे तेरा जवाब चाहिए।

           विचार सौंदर्य की दृष्टि से राष्ट्रीयता, सांस्कृतिक गौरव, नैतिक मूल्यों व व्यावहारिक शिक्षा का समावेश कवि द्वारा संस्कृति के तत्वों को अक्षुण्ण रखने का सार्थक प्रयास है।

अनुप्रास, पुनरुक्ति के द्वारा लय व तुक की उपस्थिति से नाद सौंदर्य द्रष्टव्य है—

जन-जन, जय-जय, रोम-रोम, कण-कण, क्षण-क्षण, कदम-कदम, कोरे-कोरे इत्यादि पुनरुक्ति के द्वारा विशेष प्रभाव पैदा करते हैं। रूप, धर्म व प्रभाव साम्य के आधार पर अप्रस्तुत योजना भी बेहतरीन साबित हुई है।   

              सारांशतः पुस्तक 'गुनगुनाता हूँ' युवा पीढ़ी व किशोरवय के साथ उम्रदराज व्यक्तियों को भी लुभानेवाली रचनाओं का संकलन है। समकालीन रचनाओं से लबरेज छंदबद्ध व बहर में रचित ग़ज़लें जीवन के सार को प्रस्तुत कर मन को सुकून देनेवाली है। पुस्तक की रचना हेतु साधुवाद व भविष्य के बेहतर साहित्य-सर्जन की उम्मीद व विश्वास की मनःकामना के साथ पुनश्च आभार।

              © मनोज व्यास, व्याख्याता (हिन्दी)

                राउमावि जोधियासी (नागौर)    

Tuesday, June 21, 2022

योग दिवस समारोहपूर्वक मनाया

 








योग दिवस समारोहपूर्वक मनाया ~

          रा.उ.मा.वि., जोधियासी (नागौर) में 8वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन समारोहपूर्वक किया गया। प्रधानाचार्य मनोज व्यास ने अष्टांग योग का महत्व बताते हुए नियमित योग व प्राणायाम करने का आह्वान किया। 

           आयुर्वेद चिकित्सक संतप्रसाद त्रिपाठी के निर्देशन में विभिन्न आसन व प्राणायाम का अभ्यास करवाए गये। उन्होंने स्वस्थ शरीर हेतु योग व प्राणायाम की महत्ता को बताते हुए उत्तम स्वास्थ्य  संबंधी गुर बताए।

            ग्राम पंचायत जोधियासी की सभी राजकीय व निजी स्कूल के शिक्षकों, अन्य विभागों के कार्मिकों, आँगनवाड़ी कार्यकर्ता, साथिन, आशा सहयोगिनी व विद्यार्थियों ने पूर्ण तल्लीनता से योग क्रियाएँ की।

      कार्यक्रम में हिस्सा लेनेवालों में चिकित्सक डाॅ रामूराम, शाला स्टाफ रामेश्वर लाल, अंजू शर्मा, कन्हैयालाल, चोखाराम, कालूराम, रमेशनाथ,  प्रहलाद सहाय, धनसुखराम व अन्य कार्मिकों में श्रवणसिंह, माँगूसिंह, दिनेश बंजारा, मानाराम, मंजु ओझा, बेगनाथ, लोकेश निरंजनी, हनुमानदास, देवाराम, गिरधारीराम, सरिता, संतोष, प्रेमादेवी,  पार्वती, राजकुमार शर्मा, छैलाराम, टीनू कंवर, राजल, पवन सारस्वत, मनीष, ऋतु सहित विभिन्न अभिभावकगण व विद्यार्थी उपस्थित रहे। व्याख्याता बोदूसिंह ने कार्यक्रम का सफल संचालन किया।