पारीक वंश भास्कर का लोकार्पण
आज नागौर स्थित गायत्री भवन- पारीकों की पोल में शिक्षक कवि गिरिराज व्यास द्वारा लिखित चतुर्थ पुस्तक 'पारीक वंश भास्कर' का लोकार्पण हुआ। समारोह में बतौर मुख्य अतिथि तृप्ति पारीक ने कहा कि समाज से संस्कार, धरोहर, शिक्षा प्राप्त होती है। पुस्तक द्वारा समाज के इतिहास व गौरवमयी परंपराओं को जानने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि इसे अनूदित कर अन्य भाषाओं में प्रसारित कर विश्वव्यापी बनाएं, ताकि आनेवाली पीढ़ी तक इसकी पहुँच बने। इसे कहानी रूप में या पद्य रूपांतरण कर सरल बनाया जाए जिससे बच्चे आसानी से आत्मसात् कर सके।
लोकार्पण समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में सम्बोधित करते हुए संस्कृत प्रोफेसर आशुतोष पारीक ने कहा कि हर व्यक्ति को स्वयं को जानने का भी प्रयास होना चाहिए। 5 प्रकार की विद्याओं का उल्लेख करते हुए स्वाध्याय व पठन की परंपरा को पुनर्जीवित करने का आह्वान किया। उन्होंने जीवन में श्रेष्ठता हेतु ज्ञान को आवश्यक बताया। साथ ही कहा कि वर्तमान पीढ़ी को ज्ञान की विरासत को आगे ले जाना जरूरी है।
समारोह में प्रखर वक्ता प्रो. भवानीशंकर रांकावत ने कहा कि पुस्तक से नवीन जानकारी व प्रसंग पढ़ने को मिलेंगे। उन्होंने कहा कि विषयबद्ध व क्रमबद्ध वाङ्मय समाज हेतु जरूरी है, जो यह ग्रंथ कदाचित् पूर्ण कर पाएगा। लवजीत पारीक ने इस ग्रंथ की प्रशंसा करते हुए समाज हेतु महत्वपूर्ण दस्तावेज व नयी पीढ़ी हेतु उपयोगी बताया।
नवोदित गायिका प्रगति पारीक ने मधुर स्वर में 'सरस्वती वन्दना' प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।
इस अवसर पर प्राचार्य मनोज व्यास ने स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह पुस्तक अध्यात्म, संस्कृति और मानवीय जीवन मूल्यों का अनूठा सम्मिश्रण है। उन्होंने पुस्तक के मुख्य बिंदुओं के जरिए संक्षिप्त पुस्तकीय समीक्षा भी की।
समारोह में पुस्तक रचयिता गिरिराज व्यास ने कहा कि साहित्य के अभाव मे युवा पथभ्रष्ट होकर हमारी संस्कृति व संस्कारों को खो देंगे, अतः साहित्य सर्जन आवश्यक है। उन्होंने पौराणिक प्रसंगों के जरिए अपनी अभिव्यक्ति देते हुए युवा पीढ़ी को संस्कृति व समाज के बेहतर तत्वों को संरक्षित करने पर बल दिया।
सत्यपालजी सांदू द्वारा कानदानजी का गीत 'आजादी रा रुखाळा' की प्रस्तुति देकर पाठकों को भावविभोर किया। मनोहर पारीक ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय समाज हमें त्याग, तपस्या, चरित्र, कर्म की शिक्षा देता है। श्रेष्ठ पुस्तक सर्जन व प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध कराने हेतु लेखक का आभार ज्ञापित किया।
कार्यक्रम में गणपतलाल पारीक, सुरेश पारीक, डॉ. मंजु सारस्वत व सत्यनारायण पारीक ने भी संबोधित करते हुए इस पुस्तक के महत्व को प्रतिपादित करते हुए इसे युवाओं हेतु संग्रहणीय बताया। विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार नरेन्द्र पारीक ने कार्यक्रम का संयोजन किया। इस अवसर पर सभी अतिथियों को स्मृति चिह्न भेंट किए गये।
इस अवसर पर सिद्धार्थ व्यास ने कविता की बेहतर प्रस्तुति दी। समारोह में गोपाल पारीक, निर्मल पारीक, बजरंग पारीक, नंदकिशोर व्यास, दामोदर पारीक, बद्रीनारायण पांड्या, वेणीगोपाल, उगमचंद, महेश पारीक, मुकेश पारीक, रुचिर पारीक, नवीन माथुर, सुनील सेन, चेतन सर्वा, सुशील व्यास, बृजमोहन पारीक, पप्पू पेंटर, नरेंद्र जोशी, प्रतीक पारीक, महेश पारीक, मुकेश पारीक, रुचिर पारीक, नवीन माथुर, सुनील सेन, चेतन सर्वा, सुशील व्यास, दीपक पारीक, पवन श्रीमाली, इंद्रचंद, भेरोसिंह, रामावतार, महेंद्रपाल व्यास, निरंजन लाल व्यास, महावीर प्रसाद व्यास, महेशचंद्र व्यास, कुलदीप पारीक, श्रेयांश सिंघवी, सीताराम, नीलम, अजयपाल, पृथ्वीराज, मंजु व्यास, चित्रा व्यास, चेतना व्यास, धर्मा व्यास, सरिता व्यास, अमित पारीक, रवि पारीक, अनुराधा, दीपक, रियांश, कुणाल, प्रज्ञा, साक्षी, अविका व बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहें। आयकर अधिकारी प्रदीप पारीक ने सबका धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का सफल संचालन शरद जोशी ने किया।





