कुचामन नवोदय की पावन धरा पर
एलुमनी मीट का आयोजन!
मौसम की रुमानियत; तरन्नुम में गूँजते नगमों व थिरकते कदमों के बीच कदीमी यादों का पिटारा जो खुला तो उसमें छलकते पैमानों की मधुर स्मृतियाँ घंटों दिल को कचोटती रही। मनः मस्तिष्क में संजोए सलोने सपनों के संसार में हिलोरे लेती सौहार्द की भावसिक्त सरिताएं आप्लावित हुई तो सहज ही बचपन जीवंत हो उठा।
नवोदयन की समेकित वाणी से हिम्मत और सकारात्मक वैचारिकता का जयघोष हुआ तो मानो हर नवोदयन अपने को जिम्मेदार समझ कर्तव्यपरायणता को निर्वहन करने की मनःकामना लिए पुलकित हो उठा।
1997 के सम्मान समारोह में आयोजित कार्यक्रम में गुरुजन व पूर्व विद्यार्थियों ने अपने अनुभवों से बच्चों की हौसला अफजाई की वहीं सुयोग्य नागरिक बनकर देश-सेवा करने की नसीहत दी। कक्षा 6 से 12 के विद्यार्थियों को कर्मठता, ईमानदारी, साहस, संघर्ष के पाठ के जरिए कार्यक्रम में ऊर्जा पैदा की, साथ ही मंजिल प्राप्ति की बाधाओं व कंटकावृत्त राहों से पार पाने की योग्यता विकसित करने का आह्वान किया।मनोज व्यास ने समाज में समरसता का बीजारोपण कर समाज के उत्थान का नैरंतर्य बनाए रखते हुए अपनी प्रतिबद्धता की मशाल को जलाए रखने पर बल दिया।
नवोदय परिवार के इस स्नेह मिलन में गुरुजन मुदगलजी सर, हरदेवजी सर, बशीरजी सर, पेपसिंहजी सर व विद्यालय के प्राचार्य तथा शिक्षकवृंद की उपस्थिति निस्संदेह उनके स्नेह व दुलार का परिचायक बनी। सैकड़ों एलुमनीज ने सहभागिता की वहीं कुछ अभिभावकगण भी उपस्थित थे।
प्रथम बैच के एलुमनी भरतपाल, कैलाश कासनियां, सुरेंद्र कागट, ईसाक भुट्टो, नारायण दैया, मनोज व्यास, मानाराम, जगदीश जिंगल, प्रहलाद राम को स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया। साथ ही पूर्व के गुरुजन व 1997 बैच के साथियों के विशेष सम्मान के साथ सभी एलुमनीज को 1998 बैच द्वारा बैग भेंट कर सम्मान किया गया। साथ ही प्रतिभाशाली व उत्कृष्ट बच्चों को पारितोषिक प्रदान किया गया। विद्यार्थियों के बेहतरीन नृत्य, गीत-संगीत, योगा व पिरामिड जैसी मनमोहक प्रस्तुतियों से कार्यक्रम में समां बँध गया।
इस अवसर पर मनीष पारीक को नया अध्यक्ष मनोनीत किया गया। प्राचार्य ओमवती जी दीक्षित ने सबका धन्यवाद ज्ञापित किया। हनुमान चोयल ने रोचक व शायराना अंदाज में कार्यक्रम का संचालन किया।





