बचपन की यादों के दीप प्रज्वलित हो उठे और मनः मस्तिष्क में संजोए सलोने सपनों के संसार में हिलोरे लेती सौहार्द की भावासिक्त सरिताएं आप्लावित हुई तो सहज ही नैतिक वैचारिकता का दृढ़ संकल्प जीवंत हो उठा। नवोदयन की उदात्त विचारों से परिपूरित वाणी से जो जयघोष हुआ तो मानो हर नवोदयन अपने को जिम्मेदार समझ कर्तव्यपरायणता को निर्वहन करने की मनःकामना लिए पुलकित हो उठा।
प्रथम बैच (1993) के उत्तीर्ण होने के 25 वर्षोपरांत सिल्वर जुबली कार्यक्रम के शानदार आयोजन में पूर्व विद्यार्थियों ने अपने अनुभवों से बच्चों की हौसला अफजाई की वहीं उन्हें सुयोग्य नागरिक बनकर देश-सेवा की नसीहत भी दी। कक्षा 6 से 12 के विद्यार्थियों को कर्मठता, ईमानदारी, साहस, संघर्ष का पाठ पढा़कर कार्यक्रम में ज्ञान गंगा प्रवाहित की, साथ ही लक्ष्य प्राप्ति की बाधाओं व कंटकावृत्त राहों से पार पाने की योग्यता विकसित करने का आह्वान किया।
नवोदय परिवार के इस स्नेह मिलन में गुरुजन हरदेवारामजी, पेफसिंह राजावतजी, नकवी साहब, डी के जैन व विद्यालय के शिक्षकवृंद की उपस्थिति निस्संदेह उनके स्नेह व दुलार का परिचायक बनी। अन्य जिलों के एलुमनीज ने भी सहभागिता की व अभिभावकगण भी उपस्थित थे।
1993 बैच के एलुमनी डाॅ राजकुमार बिश्नोई, नेमीचंद पारीक, कैलाश कासनियां, हनुमान चोयल, ईसाक भुट्टो, रेंवतराम, फरसाराम, रामप्रसाद तंवर, नारायण दैया, मंगलाराम, कैलाश पंवार, नंदलाल जांगिड़, बालूराम डूडी, दिनेश शर्मा, मनोज व्यास, रामनारायण, मानाराम, हरिराम, जगदीश जिंगल को शाॅल ओढाकर स्मृति चिह्न प्रदानकर सम्मानित किया।
इस अवसर पर ओम पूनिया को नया अध्यक्ष मनोनीत किया गया। सूरजनारायण चौहान व सीताराम नारनोलिया ने सबका धन्यवाद ज्ञापित किया।







