माॅडल स्कूल, नागौर में मौसम की रुमानियत व तरन्नुम में गूँजते नगमों के बीच कदीमी यादों का पिटारा जो खुला तो उसमें छलकते यादों के पैमानों की मधुर स्मृतियाँ घंटों दिल को कचोटती रही।
तसव्वुर में बसे रंगीं ख्यालात के हरेक हर्फ़ निगाहों में यों दमक उठे गोया तारीख़ के बीते लम्हों की यादें जवां हो गयी हो! मधुर स्मृतियों में शुमार हर क्षण, हर वस्तु दिलोदिमाग में तरोताजा हो गयी। जज्बातों की आँधियों में बिखरे थे वे कदीमी यादों के वरक, जिनकी खुशबू में महक रहे थे नवोदयन..!
कभी गुदगुदाती रही बचपन की भोली-सी दास्तान; कभी बिछड़े साथियों से गुजरे जमाने की खट्टी मीठी यादें रह रहके हृदय की वीणा के तारों को झंकृत कर रही थी। अधरों पे खिली तबस्सुम व कहकहों की गूँज फिजाओं में समरसता व सहृदयता का सम्मिश्रण लाकर अपनी सदाएं फैला रही थी।
दीपावली स्नेह मिलन में वरिष्ठ नवोदयन प्रो. कागट ने छोटे भाइयों से अपने कर्तृत्व को उदात्त व विलक्षण रूप देने की नसीहत दी। वहीं व्याख्याता मनोज व्यास ने समाज में समरसता का बीजारोपण कर समाज के उत्थान का नैरंतर्य बनाए रखते हुए अपनी प्रतिबद्धता की मशाल को जलाए रखने पर बल दिया।
स्थानीय विद्यालय के प्रधानाचार्य मनीष पारीक ने आपसी सद्भाव व सौहार्द की सरिताएं प्रवाहित कर सबके हितार्थ कार्य करने व यथाशक्य सहयोग का आह्वान किया। BCMHO डाॅ. राजेश बुगासरा ने जूनियर साथियों व जरूरतमंद विद्यार्थियों की यथोचित व सामर्थ्य से सहयोग कर उन्हें सबलता प्रदान करने हेतु कार्य योजना बनाने का प्रारूप रखा।
एलुमनी अध्यक्ष ओम पूनिया ने भी जूनियर विद्यार्थियों को संबल व सहयोग प्रदान कर नवोदयन की पुनीत वैचारिकता के सहारे समाज में सबके उत्थान को तरजीह देने की बात रखी व उसे अमली जामा पहनाने पर बल दिया।
वरिष्ठ एलुमनी मुकनाराम ने हास्य की फूलझड़ियों के मध्य देश के कोने-कोने में व्याप्त नवोदयन की वैचारिकता को समाज में फैलाकर उसकी कलुषित मानसिकता मिटाने पर बल दिया। विभिन्न जिलों में कार्यरत नवोदयन फरसाराम, BDO डाॅ. मूलाराम जांगू, डाॅ. भंवरलाल बिस्सु, डाॅ. नथमल, डाॅ. चंद्रमोहन, हीरालाल, पेमाराम, जगदीश भाकल, संतोष मिर्धा, रुचिर पारीक, पत्रिका चीफ रिपोर्टर श्यामलाल, मुकेश पुरोहित, डाॅ जयपाल, डाॅ. शंकरलाल, रवीन्द्र, हनुमान, सुभाष व अन्य साथियों ने अपनी बात रखते हुए इस स्नेह मिलन को सार्थक मानकर इसे नवोदयन की समुज्ज्वल संभावनाओं के द्वार अनावृत्त करने में सहयोगी माना व भविष्य के उजले पन्नों को लिखने में सक्षम करार दिया।