Sunday, January 27, 2019

अक्षर चिन्मय का लोकार्पण~

















लेखक, विचारक व कवि गिरिराज व्यास की सद्यः प्रकाशित पुस्तक अक्षर चिन्मय का लोकार्पण कार्यक्रम हाउसिंग बोर्ड नागौर स्थित सामुदायिक भवन में समारोहपूर्वक संपन्न हुआ। सरस्वती पूजन के साथ कार्यक्रम का प्रारंभ हुआ, तदुपरांत प्रज्ञा व साक्षी व्यास ने सरस्वती वंदना की प्रस्तुति दी।
          स्वागत भाषण में व्याख्याता मनोज व्यास ने पुस्तक के कला व भाव सौंदर्य पर प्रकाश डालते हुए पुस्तक की समाज में प्रासंगिकता व उपादेयता को स्पष्ट किया।
          रचनाकार गिरिराज व्यास ने अपनी पुस्तक के सृजन को साहित्य के महायज्ञ में एक आहुति मात्र बताते हुए समाज के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की और अपनी रचना लोकार्पित की।
          विशिष्ट अतिथि व राजस्थानी साहित्यकार पवन पहाड़िया ने गिरिराज व्यास की प्रथम पुस्तक में उनकी श्रेष्ठ वैचारिकता की सराहना करते हुए निरंतर साहित्य सृजन पर बल दिया।
          मुख्य अतिथि व साहित्य अकादमी के सदस्य मोहनलाल गुप्ता ने इस कृति को समाज हेतु नयी दिशा प्रदान करनेवाली रचना करार दिया और रचनाकार के भविष्य को उज्ज्वल बताया।
           मुख्य वक्ता व विशिष्ट अतिथि प्रो. भवानीशंकर रांकावत ने अक्षर चिन्मय की कविताओं की सार्थकता प्रकट करते हुए इनमें निहित भावों को समाज हितार्थ बताया।
          कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राजस्थानी साहित्यकार लक्ष्मणदान कविया ने इस कृति को साहित्य का नवोन्मेष बताते हुए कविताओं को गूढ़ भावों से युक्त बताया। साथ ही उपस्थित सुधि पाठकगण का धन्यवाद ज्ञापित किया।
         शिक्षक संघ के नेता पुरखाराम चौधरी व प्रधानाध्यापक राजेंद्र राज ने  भी गिरिराज व्यास के साहित्य के क्षेत्र में  सफलता की कामना की व इस कृति को श्रेष्ठ बताते युवा पीढ़ी हेतु प्रेरणादायक बताया।
         कार्यक्रम में नागौर शहर व अन्य स्थानों से पधारे श्रोतागण का संयोजक नरेन्द्र पारीक ने भी आभार व्यक्त किया। आयोजित हुए समारोह के दौरान रामपाल व्यास, महेंद्रपाल व्यास, निरंजनलाल व्यास,  महावीर प्रसाद व्यास, अजयपाल व्यास, पृथ्वीराज व्यास, दीपक व्यास, शंकरलाल चतुर्वेदी, पवन श्रीमाली, विक्रम जोशी, ललित पाराशर, नवीन माथुर, पवन तिवारी, प्रीति गोरा, कमला कड़वासरा, सुरेश पारीक, सुशील व्यास, रामकन्या मनिहार, हेमा पारीक, मंजु व्यास, चित्रा व्यास, चेतना व्यास, धर्मा व्यास, सरिता व्यास, अनुराधा, रियांश व्यास, कुणाल व्यास, अविका व्यास व सिद्धार्थ व्यास सहित बड़ी संख्या में शहर व आसपास के गांवों के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन शरद जोशी ने किया।


Saturday, January 26, 2019

गणतंत्र दिवस मनाया~


रा.उ.मा.वि., जोधियासी (नागौर) में
70वाँ गणतंत्र दिवस समारोहपूर्वक मनाया गया। श्री दौलतराम सारण व  सरपंच कर्णसिंह के मुख्य आतिथ्य में प्रधानाचार्य नवीन माथुर ने ध्वजारोहण किया।  इसके उपरान्त विद्यार्थियों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम की शानदार प्रस्तुति दी गई। इनमें आरंभ है प्रचंड, मेंहदी रची म्हारे हाथां में, म्हारो राजस्थान, देशभक्ति रीमिक्स, केसरिया बालम, नगाड़े संग ढोल बाजे, जिस देश में गंगा रहता है जैसे गीतों पर खुबसूरत नृत्य प्रस्तुत किए गए।
इसके अलावा देशभक्ति गीत, कविताएं प्रस्तुत कर ग्रामीणों का खूब मनोरंजन किया गया। मुख्य अतिथि दौलतराम सारण ने विद्यार्थियों से देश सेवा का आह्वान करते हुए उन्हें अध्ययन के प्रति निष्ठा रखने को प्रेरित किया। प्रधानाचार्य नवीन माथुर ने लोकतंत्र की स्थापना की कहानी बताते हुए शहीदों का स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
सरपंच महोदय, छगनमल नाहर व प्रधानाचार्य नवीन माथुर ने मेधावी विद्यार्थियों को व कृष्णा कुलदीप ने PCRA चित्रकला प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार वितरित किए। मंच संचालन हिन्दी व्याख्याता मनोज व्यास ने किया।



Saturday, January 12, 2019

केरियर डे का आयोजन ~




जोधियासी कस्बे के राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय में विवेकानन्द की 156वीं जयंती के अवसर पर केरियर डे का आयोजन समारोहपूर्वक किया गया।
      डाॅ. अमित राठी, सरपंच कर्णसिंह, भारत विकास परिषद् के पूर्व अध्यक्ष व  संरक्षक प्रो. भवानीशंकर रांकावत, विभिन्न पदाधिकारियों हेमंत जोशी, विक्रम,  सागर सरवा, रविप्रकाश सोनी, हरिराम धारणियां, मनोज जैन, विंग कमांडर पी एम बेनिवाल, श्रवण सोनी के मुख्य आतिथ्य में कार्यक्रम का प्रारंभ विवेकानन्द की मूर्ति के समक्ष दीप प्रज्वलित कर हुआ। इसके उपरांत  छात्राओं ने स्वागत गान प्रस्तुत किया।
      इस अवसर पर आयोजित केरियर वार्ता के तहत डाॅ. अमित राठी ने लक्ष्य प्राप्ति हेतु विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए कठिन परिश्रम पर बल दिया।
सेवानिवृत्त विंग कमांडर पी एम बेनिवाल ने समय के महत्त्व को समझकर धैर्य के साथ निरंतर मंजिल प्राप्ति हेतु अग्रसर होने का आह्वान किया।
           प्रो. भवानीशंकर रांकावत ने विवेकानन्द के प्रसंगों के माध्यम से उनके दर्शन, मानवीय मूल्यों से विद्यार्थियों को प्रेरित होकर लक्ष्य प्राप्ति हेतु प्रतिपल बढ़ते रहने की नसीहत दी।
हेमंत जोशी ने भारत विकास परिषद् के कार्यों से अवगत कराते हुए विद्यार्थियों को विवेकानन्द के पद चिह्नों पर चलकर देश सेवा का आह्वान किया।
      केरियर डे पर विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। कार्यक्रम संयोजक प्रीति गोरा द्वारा घोषित परिणाम के अनुसार पत्र वाचन में प्रथम तीन स्थानों पर क्रमशः रवीन्द्र, सुलोचना व रामेश्वरी रहे;  निबंध में मोनिका, मेगाराम व सुभाष ने प्रथम तीन स्थान हासिल किए; केरियर चार्ट के विजेताओं में सुमन, रामेश्वरी व चंदा सुथार ने प्रथम तीन स्थान प्राप्त किए। इन विजेताओं के साथ मेधावी विद्यार्थियों मेगाराम, रामेश्वरी व सुभाष को भी भारत विकास परिषद् द्वारा पुरस्कृत किया गया।
      विद्यालय के प्रधानाचार्य नवीन माथुर ने भारत विकास परिषद् के सभी पदाधिकारियों व अतिथिगण का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए विद्यालय की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। मंच संचालन व्याख्याता मनोज व्यास ने किया।
       कार्यक्रम में स्टाफ सदस्यों बोदूसिंह, रामेश्वर लाल, अंजू शर्मा, कमला कड़वासरा, दिनेश गौड़, पवन तिवारी, कन्हैयालाल, चोखाराम, कालूराम, हनुमान मीणा, रमेशनाथ, नारायणदान, रेखा साद, मुकेश यादव, धनसुखराम सहित शाला के सभी विद्यार्थी उपस्थित रहे।

Saturday, January 5, 2019

शिक्षक व शिक्षण कार्य~

शिक्षक का यथार्थ और उसकी कार्यशैली पर बेबाक अभिव्यक्ति निस्सन्देह समीचीन प्रतीत होती है। पर महज छींटाकशी और छिद्रान्वेषण शिक्षकों में ऊर्जस्विता नहीं ला सकती अपितु उनके कार्यक्षमता को क्षीण करती है; उनके द्वारा कर्मठता की नयी ताबीर लिखने के जज्बे को बेवजह रोकती है। हर पल गैर शैक्षणिक कार्यों से रोड़े अटकाकर शिक्षण कार्य के नैरंतर्य को रोका जा रहा है।  शिक्षक के हृदय में तरंगित विभिन्न संवेगों को उद्घाटित करती मनःस्थिति; शिक्षा-सरिता को निर्बाध प्रवाहित करने में अनेकानेक विकट परिस्थितियाँ सुरसा की मानिंद दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। जहाँ कुछ शिक्षक भी पथ विचलित हो चले हैं, कुछ नैराश्य भावासिक्त विचारबोध में पूर्णरूपेण कार्य नहीं कर पा रहे। कुछ मीडिया का पक्षपातपूर्ण रवैया व अफसरशाही इसमें मानो आग में घी डालने का कार्य अंजाम दे रहा है। साथ ही समाजकंटक व संकीर्ण वैचारिकता से परिपूर्ण लोग अपनी मनःकामना को पूर्णाहुति देने को दृढ़संकल्प हैं। शिक्षा के मंदिर व पुजारियों के प्रति नकारात्मकता समाज के लोगों व अफसरों की हीन भावों की जीती जागती तस्वीर है। प्रतिपल शिक्षा पर आघात व प्रतिघात; मेहनतकश लोगों पर भी नुक्ताचीनी; विद्यालयों को महज कार्यशाला बनाके रख देना कमोबेश अनुचित लगता है। आज आवश्यकता है शिक्षक को पुनः गरिमा के पद पर प्रतिष्ठापित करने की; उसके मूल कार्यों से परिपूरित करने की व समाज के विक्षिप्त वैचारिकता के लोगों से निजात दिलवाकर शैक्षिक जागृति लाने की। वरना कुछ सालों में शिक्षा का बाजारीकरण होकर उसका उन्मुक्त उपहास उड़ाया जाएगा व समाज के ठेकेदार उसका जनाजा निकाल देंगे।
अतएव शिक्षकवृंद अपने अधिकारों के साथ कर्तव्यबोध के प्रति सजगता दिखाएं।
साधुवाद।
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    © मनोज व्यास