टीम का हौसला : फतह का जश्न~
(युवाओं को प्रेरणा)
जोश और जुनून का जज़्बा लिए सफर को निकलते हैं तो ख्वाबों की ताबीर लिखी जाती है। गाबा की ऐतिहासिक विजय ने युवाओं के समक्ष प्रत्यक्षतः साबित किया है कि जब दिल में कुछ कर गुजरने की तमन्ना हो तो पुरखतर राहें भी इरादों को नहीं बदल सकती है।
वनडे सीरीज की हार के बाद T-20 की जीत हासिल कर संभले ही थे कि एडिलेड में 36 रन पर पूरी टीम आउट हो गयी फलतः भारतीयों को मन मसोसकर रहना पड़ा था। लेकिन अजिंक्या रहाणे ने संपूर्ण टीम में गोया प्राण फूंक दिए और पूरे मनोबल से टीम ने एकजुट होकर मेलबोर्न में भारतीय परचम लहराया। सिडनी में आस्ट्रेलिया ने पुनः जोश में आकर भारतीयों को पटखनी देने की हरचंद कोशिश की पर भारतीयों ने ईंट का जवाब पत्थर से दिया और उसे मुँह की खानी पड़ी।
अब भारतीयों का हौसला बढ़ चुका था; गावस्कर बाॅर्डर ट्राॅफी पर नजरे गड़ाए भारतीयों शेरों ने आस्ट्रेलिया की माँद से उसी का शिकार करने की मन में ठान रखी थी। अदम्य साहस के बलबूते पर पूरी टीम ने मनोयोग से विपक्षियों के दाँत खट्टे कर दिए। आस्ट्रेलिया को गाबा में 32 साल बाद चौथी पारी में 329 रन बनाते हुए कंगारुओं को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया।
'गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तिफ़्ल क्या गिरे जो घुटनों के बल चले।' की उक्ति को फलीभूत कर भारतीय टीम ने अपना लोहा मनवाया और युवाओं को एक प्रेरणा दी कि आखिरी दम तक हिम्मत का दामन पकड़ कर रखें बेशक विजयश्री आपके कदम चूमेगी।
पुनश्च भारतीय टीम को हार्दिक बधाई!!!
© मनोज व्यास




