Saturday, June 18, 2022

पुस्तक "गुन‌गुनाता हूँ" का समारोहपूर्वक लोकार्पण

 


 पुस्तक "गुन‌गुनाता हूँ" का समारोहपूर्वक लोकार्पण















नागौर, आज नागौर स्थित गायत्री भवन- पारीकों की पोल के सभागार में शिक्षक कवि गिरिराज व्यास द्वारा लिखित तीसरी पुस्तक 'गुनगुनाता हूँ' के लोकार्पण समारोह में वरिष्ठ साहित्यकार श्री चरणसिंह पथिक ने बतौर मुख्य अतिथि कहा कि कविता की साधना सबसे कठिन होती है, रचनाकार की समाज में बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है और हर रचना अपने समय का दस्तावेज होती है।  

         लोकार्पण समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में सम्बोधित करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार एवं प्रखर वक्ता श्री कृष्ण कल्पित ने कहा कि वीरों और कवियों का संबंध जैसा राजस्थान की धरा पर है ऐसा संबंध दुनिया में अन्यत्र दुर्लभ है। यह परम्परा निरन्तर चली आ रही है। उन्होंने गुनगुनाने और गाने में बड़ा अंतर बताया। 

         समारोह के अध्यक्ष व प्रखर वक्ता प्रो. भवानीशंकर रांकावत ने कहा कि कवि होना सहज काम नहीं है, कवि के द्वारा जो समाज में देखा व महसूस किया जाता है, उसे अपनी काव्य रचना के जरिए समाज के सामने रखता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र का गौरव और राष्ट्र की अस्मिता बनाये रखने का भी अहम दायित्व कवियों और साहित्यकारों का होता है। गिरिराज व्यास ने अपनी रचना में वर्तमान के दौर मैं जो भी चल रहा है, उसे उसे अपनी रचना‌ओं में बखूबी निभाया है। 

         गीतकार श्री धनराज दाधीच ने "गांव गली चौबारा छूट्‌या, एक पेट के कारणे" अपनी सुन्दर रचना सुनाकर सभी श्रोताओं को भाव विभोर किया। राजस्थानी भाषा के वरिष्ठ साहित्यकार पवन पहाड़िया ने कहा कि "गुनगुनाता हूँ" पुस्तक में लेखक गिरिराज व्यास ने छंद को प्रमुखता दी है और इसी कारण यह पुस्तक समृद्ध बन पाई है। उन्होंने बाल-साहित्य सृजन का आग्रह भी किया। 

      अखिल भारतीय राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति के संस्थापक वरिष्ठ साहित्यकार श्री लक्ष्मणदान कविया ने संबोधित करते हुए कहा कि "गुनगुनाता हूँ" काव्य रचना में गिरिराज व्यास ने विभिन्न विधाओं का समावेश किया है। यह कृति युवाओं हेतु प्रेरणादायक सिद्ध होगी। उन्होंने इन अवसर पर सभी साहित्यकारों को स्मृति चिन्ह भेंट किए। राजस्थानी ख्यातनाम कवि प्रहलाद सिंह झोरड़ा ने 'वीणा वादिनी मां सरस्वती' वन्दना प्रस्तुत की तथा राजस्थानी गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। 

      इस अवसर पर हिन्दी व्याख्याता मनोज व्यास ने स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह पुस्तक अध्यात्म, देशभक्ति और मानवीय जीवन मूल्यों की त्रिवेणी का अनूठा संगम है। उन्होंने काव्यांग विवेचन के जरिए पुस्तकीय समीक्षा भी की।

      समारोह में पुस्तक रचयिता श्री गिरिराज व्यास ने कहा कि जब भी कविताएं सशक्त हुई है तब-तब समाज और राष्ट्र मजबूत हुए हैं। उन्होंने कहा कि साहित्य वह प्रवाह है जो वर्तमान को जोड़ने का काम करता है। कवि-काव्य की दो स्थितियाँ होती है- पहली कवि जो काव्य बनाता है, जबकि दूसरी स्थिति वह जब काव्य कवि को बनाता है। इन दोनों में उन्होंने दूसरी स्थिति को श्रेष्ठ माना। उन्होंने साहित्यकारों के प्रेरक प्रसंगों के जरिए अपनी अभिव्यक्ति दी।

         विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार नरेन्द्र पारीक ने कार्यक्रम का संयोजन किया। गायक कलाकार मुन्ना स्वर्णकार का "गुनगुनाता हूँ" पुस्तक के पाँच गीतों को स्वर देने हेतु स्वागत किया गया। 

         इस अवसर पर बाल कलाकार सिद्धार्थ व्यास की 'बाल पुस्तिका "आओ बच्चों हम गीत लिखे" पुस्तक का अथितियों द्वारा लोकार्पण किया गया। साथ ही शहीद सुगनसिंह की स्मृति में साहित्यकार तिलोकचन्द्र द्वारा लिखित कविता "नमन" स्मृति चिह्न के रूप में शहीद सुगनसिंह के पुत्र श्री मांगूसिंह को भेंट किया गया। 

         समारोह में रामपाल व्यास, जंवरीलाल भट्ट, भंवरलाल कासनिया, निरंजन पारीक, महेंद्रपाल, आनंद पारीक, निरंजन व्यास, महावीर प्रसाद व्यास, महेश व्यास, दिलीप पित्ती, रामकिशोर फिडोदा, जिनेन्द्र जैन, शिवशंकर व्यास, मोहनराम कसवां, कुलदीप पारीक, धर्मपाल, श्रेयांश, गणपतलाल पारीक, शंकरलाल चतुर्वेदी, रामरतन लटियाल, बरंगलाल जोशी, अजयपाल, पृथ्वीराज, मंजु व्यास, चित्रा व्यास, चेतना व्यास, धर्मा व्यास, सरिता व्यास, दीपक, रियांश, कुणाल, प्रज्ञा, साक्षी, अविका आदि भी उपस्थित रहें। कार्यक्रम का सफल संचालन शरद जोशी ने किया।

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