Sunday, May 16, 2021

स्त्री मर्दाना बन जाओ

 



नारी शक्ति को समर्पित मेरी रचना~

स्त्री मर्दाना बन जाओ


युगों युगों नकली काराओं में

खुद को तुमने बाँध रखा था

त्याग व नम्रता की मूरत बन

अपमान का स्वाद चखा था।

पौरुष के प्रतीक योद्धाओं में

चीर हरण को स्वीकार लिया

बलशाली अत्याचारी के सब

छल बल को अंगीकार किया।

अबला नहीं तुम यह समझो

अपनी शक्ति को खुद जानो

निर्बलता के घेरे मिट जाएंगे

सबलता की भाषा पहचानो।

चुप्पी को देख कितने भेड़िए

नारी को शिकार बना लेते हैं

हवस के नाना प्रकारों को यों

महिलाओं पर दिखला देते हैं।

बहुत सह लिया अत्याचार

तोड़ो इन नकली जंजीरों को

स्वावलंबी बनकर रहो सदा

मिटा दो परवश लकीरों को।

उठो वीरांगना बनकर नारी

फिर से विप्लव राग गाओ 

बलवती बनके फिर से तुम

प्रतिशोध का बिगुल बजाओ।

अब वक्त आ गया है देखो

स्त्री तुम मर्दाना बन जाओ

परुष बने इन पुरुषों को

जरा दुर्गा रूप दिखलाओ।

अपनी ढाल तलवार बनके

खुद ही रक्षण करना होगा

जीवन की कठिन राहों पर

निर्भय होकर चलना होगा।

     © मनोज व्यास


No comments:

Post a Comment