प्यार क्या है~
अनछुआ स्पर्श
अनदेखा अहसास
सहज मिलनोत्कंठा
हृदय की वीणा के झंकृत
सुमधुर तारों का संगीत
आश्रय और विषय का
सच्चा सुखद समर्पण।
संयोग और विप्रलंभ
के भावों का शमन
स्नेह और प्रणय के
बिरवों का पल्लवन।
आशा और उम्मीद का
पल पल खनकता सितार
अपनेपन के भावों को
पिरोता मखमली स्पंदन।
मनःकामना के उद्दीप्त
अपरिमित भावासिक्त
हर्षित-सी तोष प्रतीति।
© मनोज व्यास
आपकी कविता प्यार को सही अभिव्यक्त कर रही हैं।
ReplyDeleteआभार
DeleteVery nice poem. Happy to read it.
ReplyDeleteधन्यवाद
DeleteBhaisaab bhaut achi Kavita..
ReplyDeleteआभार
Deleteवाह मनोज भाई, अप्रितम
ReplyDeleteधन्यवाद भाई
ReplyDeleteअति सुन्दर सर ...
ReplyDeleteआभार
Deleteअति सुंदर गुरूजी।
ReplyDeleteआभार
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